शादी में दुल्हा का सेहरा पहनना
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*_🥀 शादी में दुल्हा का सेहरा पहनना 🥀_*
_🌹सेहरा पहनना मुबाह है ! यानि पहने तो न कोई सवाब और अगर न पहने तो न कोई गुनाह। यह जो लोगों में मशहूर है कि सेहरा पहेनना *हुज़ूर ﷺ* की सुन्नत है, महज बातील,और सरासर झूठ है!_
*👉 कौ़ल :* _मुजद्दिदे आ़ज़म सैय्यदना आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है। कि......सेहरा न शरीअ़त में मना है न शरीअ़त में जरूरी या मुस्तहब बल्कि एक दुनियावी रस्म है कि तो क्या! न कि तो क्या! इसके अलावा जो इसे हराम गुनाह, बिदअ़त व जलालत बताए वह सख़्त झूठा सरासर मक्कार है। और जो उसे जरूरी [लाज़िम] समझे और तर्क को [सेहरा न पहेनने को] बुरा जाने और सेहरा न पहेनने वालों का मज़ाक उड़ाए वह निरा जाहिल है।_
📚 *हादिन्नास फी रूसूमिल आरास, सफा नं 42,*
_हुज़ूर शदरुश्शरीआ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फ़रमाते है। खाली फूलो का सेहरा बांधना जाइज़ है।_
*📚 बहार ए शरीअत हिस्सा 11*
_दूल्हे का सेहरा ख़ालिस असली फूलों का होना चाहिए। गुलाब के फूल हो तो बहुत बेहतर है । कि गुलाब के फूल *हुज़ूर ﷺ* ने पसन्द फरमाया है।_
_लिहाजा सेहरा पहनना ही हो तो खालीस गुलाब या चंबेली के फुलो का सेहरा पहने! सेहरे में चमक वाली पन्निया न हो कि यह ज़ीनत है। मर्द को ज़ीनत करना और ऐसा लिबास पहनना जो चमकदार हो हराम है। दुल्हन के सेहरे में अगर यह चमक वाली पन्नीया हो तो कोई हर्ज नही। के औरतो को जिनत जाइज है!_
_इसी तरह आज कल कुछ लोग सेहरे में रूपये [नोट] वगैरह लगाते हैं यह फ़ुजूल ख़र्ची और गुरूर व तक़ब्बुर की निशानी है! *तकब्बुर* शरीअ़त में सख्त हराम है! लिहाजा अगर सेहरा सिर्फ़ खुशबूदार फूलों का ही हो! शादी एक दिन की होती है, दुसरे दिन सेहरे को न तो पहना जाता है, और न ही वह किसी काम का होता है! सबसे बेहतर तो यह है के गले मे एक गुलाब के फूलों का हार डाल लिया जाए यही ज्यादा मुनासीब है!_
_मगर आज-कल बद मज़हब, वहाबी, देवबंदी, तबलीगी, जमाअत के यहा शादी-ब्याह पर दुल्हे को फूलो का सेहरा बांधने को शिर्क मानते है।_
_इसलिए अहले सुन्नत वल जमाअत में सेहरा बांधने पर जोर दिया जाता है कि। बद मज़हब, वहाबी, देवबंदी, तबलीगी, जमाअत से_ *_अहले सुन्नत वल जमाअत की मुसाबिहत (फर्क़) हो सकें।_*
*_दुलहन दूल्हे को सजाते वक्त़ की दुआ 🤲_*
दुल्हन को जो औरतें सजाए उन्हें चाहिए कि वह दुल्हन को दुआ़ए दे! हदीसे पाक में है। कि..
_उम्मुलमोमेनीन हज़रत आइशा सिद्दीक़ा [रदिअल्लाहु तआला अन्हा] इरशाद फरमाती है_
*"हुज़ूर ﷺ* _से जब मेरा निकाह हुआ तो मेरी वालिदा माजीदा मुझे हुजुर ﷺ के दौलतकदा पर लाई वहाँ अन्सार की कुछ औरतें मौजूद थी! उन्होंने मुझे सजाया और यह दुआ दी.._
*على الخیری والبراکة وعلى خير طائر*
*अलल ख़ैरे वल बराकतेे व आ़ला खै़रे त-अ-ए-रिन०*
*[ तर्जुमा :-]* _ख़ैर व बरक़त हो अल्लाह ने तुम्हारा नसीब अच्छा किया_
_बुखारी शरीफ की एक दुसरी रिवायत है के, "हुजुर ﷺ ने हजरत अब्दुर्रहमान बिन औफ रदि अल्लाहु तआला अन्हु को उनकी शादी पर इसी तरह बरकत की दुआ इरशाद फरमाई!"_
📚 *बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 87, हदीस नं 142, सफा नं 82,*
*_👉 लिहाजा हमारी इस्लामी बहनों को भी चाहिए जब वह किसी की शादी के मौके पर जाएं दुल्हन सजाते वक़्त या फिर उनसे मुलाकात करते वक्त़ बरक़त की दुआ करें इसी तरह दूल्हे को सजाने वालो को और उससे मिलने वालो को भी चाहिए की वह भी दूल्हे को सजाते या सेहरा बांधते वक्त़ या मिलते वक्त यह दुआ दें।_*
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