शादी9⃣

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               *🥀शादी🥀*    




                *_{हिस्सा-9}_*




*_👉इस्लामी हिस्ट्री उठाकर देखिये कि क्या नबी भी किसी के घर 300 बाराती लेकर गए थे क्या किसी सहाबी की बारात में 200 लोग थे या किसी ताबईन की बारात में 100 लोग ही गए हों और फिर उनको नाश्ता कराया गया हो फिर खाना खिलाया गया हो तब कहीं निकाह हुआ हो ऐसी कोई एक भी रिवायत दिखाई जाए,और बस यही नहीं बल्कि उस पर से जहेज़ का हाल ये कि खुद के घर में चाहे खाने के लाले पड़े हों मगर फ्रिज वाशिंग मशीन एयर कंडीशन और बाइक तो चाहिए ही चाहिए,जहेज़ लेने वाले कहते हैं कि जहेज़ देना सुन्नत है तो याद रखें कि हुज़ूर ने जो जहेज़ अपनी बेटी को दिया उससे आज के इस जहेज़ की कोई मुनासिबत ही नहीं ,वो ज़रूरत के सामान थे और आज ऐशो आराम और रुपयों की नुमाईश के सिवा कुछ नहीं,कुल मिलाकर बस ये समझ लीजिए कि भिखारी अपना स्टैंडर्ड बदल कर बारात लेकर पहुंच रहा है और देने वाला अपने रुपयों की नुमाइश कर रहा है,ना दीन का कुछ ख्याल रहा और ना शरीयत का कुछ लिहाज़ फिर भी हम मुसलमान हैं,और कुछ घरों का हाल तो ये हो गया है कि लड़कियां अगर चे घर में बैठी बैठी बूढी हो जाएं खुद घरवाले मगर रिश्ता करने में इतनी नुक्ता चीनी करते हैं कि अल्लाह की पनाह,हदीसे पाक में आता है कि_*

*_👉हां रस्मो में कुछ जायज़ भी हैं जैसे दूल्हा दुल्हन को उबटन लगाना अगर ना महरम ना हों और सतरपोशी का ख्याल रखा जाए तो जायज़,युंही डाल की रसम की कुछ कपड़े वग़ैरह भेजे जाते हैं जायज़,दूल्हे का सिर्फ फूलों का सेहरा पहना जायज़_*

*_👉क्या क्या कहूं,ये बहस इतनी लंबी चौड़ी है कि दो चार सतरों में बात खत्म ही नहीं हो सकती,बस इतना समझ लीजिए कि ये बीमारी कोढ़ की तरह हमारे मुआशरे को तबाहो बर्बाद कर रही है,फिर मुसलमान कहता है कि हम बहुत परेशान हैं रोज़ी की किल्लत है बच्चे बात नहीं सुनते कुछ वज़ीफा बता दीजिए,आप खुद सोचें कि इतना सारा हराम काम करते हुए क्या कोई वज़ीफा या कोई अमल मुसलमान को फायदा पहुंचा सकता है नहीं और हरगिज़ नहीं,अगर फायदा चाहते हों तो पहले अपना और अपने घर का माहौल बदलकर इस्लामी तहज़ीब में आ जाएं,इस मसले पर अल्लामा ततहीर अहमद बरेलवी का रिसाला "ब्याह शादी के बढ़ते हुए अखराजात" पढ़ा जाए बहुत मुफीद होगा_*




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*🏁MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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